Description
इसका उचित मात्रा में प्रातः सेवन करने से अर्श प्रमेय है और क्षय रोग का नाश करता है शरीर को पुष्ट करता है तथा काम शक्ति को बढ़ाता है इसका प्रभाव मूत्र पिंड मूत्र पेट की सूजन में होता है जब मूत्र दुर्गंध पूर्ण और गनदला हो तो यह पाक लेना लाभकारी है यह पौष्टिक और बलवर्धक है अति एवं शुक्र जनित या प्रमेह रोगों से उत्पन्न दुर्बलता को दूर करता है इसी तरह स्त्रियों के गर्भाशय के विकार को दूर कर यह गर्भाशय को सशक्त बना देता है!
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